पालमपुर (हिमाचल प्रदेश) 197 किलोमीटर लंबे पठानकोट-मंडी राष्ट्रीय राजमार्ग-20 में सुरक्षित सफर का दायित्व आम जनता ने बजरंग बली के हवाले कर दिया है। दुर्घटनाओं की दृष्टि से संवेदनशील स्थलों की पहचान कर वहां चेतावनी बोर्ड लगाना सरकारी कार्यपद्धति का हिस्सा है, लेकिन बीते वर्षो में ऐसा पूरी तरह न हो पाने के कारण लोगों ने दुर्घटनाओं से बचाने का जिम्मा पवनपुत्र को सौंप दिया है। दुर्घटना बहुल स्थलों पर या तो हनुमान जी की मूर्ति स्थापित कर दी गई है या फिर मंदिर ही बना दिया गया है। कुछ लोगों की मानें तो इससे हादसों में कमी आई है। राष्ट्रीय राजमार्ग के दुर्घटना वाले ठिकानों पर अधिकतर मंदिर व मूर्तियों की स्थापना का काम कुछ अर्सा पहले ही हुआ है। यहां हुई दुर्घटनाओं में कई लोग जान गंवा चुके हैं। हादसों से भयभीत लोगों ने हनुमान जी की शरण ली है। लोगों का मानना है कि मंदिर बनने या मूर्ति स्थापना के बाद इन स्थानों पर हादसे कम हो जाएंगे। इस राजमार्ग पर 40 से अधिक ब्लैंक स्पॉट हैं जहां आए दिन हादसे होते रहे हैं। लोगों ने करीब-करीब सभी ब्लैक स्पॉट पर हनुमान जी के 30 से ज्यादा मंदिर बना दिए हैं। बाकी जगह उनकी मूर्तियां लग चुकी हैं या लगने वाली हैं। स्थिति यह है कि किसी खास स्थान पर दो-चार हादसे होते ही वहां मंदिर बनाने का काम शुरु हो जाता है। हालांकि एनएच के किनारे और देवी-देवताओं के भी मंदिर हैं, लेकिन इनमें हनुमान जी के मंदिरों की संख्या सबसे ज्यादा है। इस मार्ग पर इस समय कंडवाल के पक्का टाला, बौढ में काली माता के मंदिर के साथ, नूरपुर के ढक्की, नागनी व भडवार के मध्य, कोटला-त्रिलोकपुर, छतड़ी, रैत, मटौर चौक, कच्छियारी, नगरोटा-बगवां, अरला, मारंडा, पपरोला, मोहन-घाटी ऐहजू, सुकाबाग, डगबगड़ा, लदरूही, गुम्मा, घटासनी, नारला, कुन्नू व मोहड़धार में हनुमान जी एनएच के किनारे अवस्थित हो चुके हैं। इसके अलावा भी कई और मंदिर भी हैं। इनमें ढक्की, त्रिलोकपुर-कोटला, छतड़ी, कच्छियारी, अरला व घटासनी प्रमुख हैं। एनएच-20 पर बढ़ते हादसों और उनके चलते बढ़ते मंदिरों पर अधीक्षण अभियंता आरसी गुप्ता का कहना है कि इस मार्ग में जहां भी ब्लैंक स्पॉट हैं वहां चेतावनी बोर्ड लगाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि जहां यह मार्ग संकरा है वहां इसे चौड़ा करने का काम शुरू हो गया है। मार्ग को डबल लेन करने का भी प्रयास किया जा रहा है।
No comments:
Post a Comment