Sunday, May 22, 2011

ऐतिहासिक रामजानकी मंदिर पर संकट के बादल

बिहार के सरायरंजन स्थित शाहजहां कालीन ऐतिहासिक रामजानकी मंदिर में रौनक रहा करती थी। सैकड़ों भक्त रोज पूजा-अर्चना करने आते थे पर आज इस मंदिर पर संकट के बाद छाए हुए हैं। यहां के साधु-संत पलायन कर चुके हैं और मंदिर की 125 एकड़ जमीन पर अतिक्रमणकारियों का कब्जा है। ग्रामीण दुखी स्वर में कहते हैं कि नाथ ही अनाथ हो गए हैं। जिला मुख्यालय से 20 किमी दक्षिण नरघोघी गांव में रामजानकी मंदिर स्थित है। बताया जाता है कि तकरीबन 400 साल पहले ऋषिकेश के सिद्ध संत सर्वश्री रामलला दास शिष्यों के साथ पूर्वाचल के तीर्थाटन के क्रम में यहां ठहरे थे। तत्कालीन जिला प्रमुख ने उनका शिष्यत्व ग्रहण करने के साथ ही 700 एकड़ भूमि एवं 1000 अशर्फियां अर्पित की और जिले में ही रुकने का आग्रह किया था। इसके बाद सिद्ध संत के आदेश से नरघोघी गांव में श्री रामजानकी मंदिर का निर्माण किया गया। राम, सीता व हनुमान की प्रतिमाओं को रखने के लिए मंदिर में करीब 42 मन चांदी का सिंहासन भी बना। 1975 में 12वें महंत रामरक्षा दास के समय तक मंदिर के प्रांगण में दर्जनों हाथी-घोड़े और लाव-लश्कर मौजूद थे। विजयादशमी पर्व पर धूमधाम से भगवान की रथ यात्रा निकलती थी, लेकिन अब सबकुछ बीते दिनों की बात है। 13वें महंत शिवनारायण दास कहते हैं कि मंदिर की 375 एकड़ जमीन जमींदारी प्रथा के तहत ले ली गई। 100 एकड़ जमीन भूदान में चली गई। कुछ जमीन को पूर्व महंतों ने बेच दी। 125 एकड़ से अधिक जमीन पर अतिक्रणकारियों ने कब्जा जमा रखा है। 11 एकड़ में मंदिर बना हुआ है। इसके अलावा 15 एकड़ जमीन ही मंदिर के पास है। महंत के अनुसार अतिक्रमित जमीन को मुक्त कराने के लिए कई बार जिलाधिकारी को लिखा गया, लेकिन स्थिति यथावत है। प्रखंड बीस सूत्री कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रोफेसर विनोद वाजपेयी ने बताया कि अतिक्रमणकारियों के विरुद्ध धार्मिक न्यास बोर्ड को लिखा गया है। नरघोघी के विशेश्वर रजक व उदयपुर के नंद कुमार झा समेत दर्जनों ग्रामीण मंदिर की बदहाली से दुखी हैं। पूर्व विधायक संत रामाश्रय ईश्वर के अनुसार, सरकार को इस ऐतिहासिक महत्व के स्थल के संरक्षण व सुरक्षा के उपाय करने चाहिए। सरायरंजन के बीडीओ सुधीर कुमार ने कहा, मंदिर की प्राचीन गरिमा को लौटाने के लिए धार्मिक न्यास बोर्ड को लिखा जाएगा। इस बाबत स्थानीय विधायक व सूबे के जलसंसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने भी मंदिर के सुरक्षा व विकास को लेकर आश्र्वासन दिये, लेकिन सवाल यह है कि ये कब तक पूरे होंगे ?

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