Saturday, April 30, 2011

जनता की सेवा का चमत्कार


युग पुरुष सत्य साई बाबा का परलोकगमन करोड़ों आंखों को नम कर गया। वह सिर्फ चमत्कारी साधु नहीं थे, बल्कि उनका सम्मान इसलिए सबसे ज्यादा था, क्योंकि उन्होंने जनसेवा के इतने काम किए थे जो हर किसी के लिए एक उदाहरण है। गरीबों के लिए अच्छे अस्पताल, बड़े-बड़े विश्वविद्यालय, बेहतरीन कालेज, स्कूल और गांव की जनता के लिए पीने का पानी व सिंचाई की परियोजनाएं सत्य साई बाबा ने अपने ट्रस्ट से स्थापित की थीं। इस देश में धर्म से जुड़े अनेक लोग और संस्थाएं हैं, लेकिन बहुत कम हैं जो जनता के हित के लिए काम करते हैं। साई बाबा का यह चमत्कार सबको पता है कि वह हवा में हीरे की अंगूठी, हीरे का हार और भभूति निकाल देते थे। यह मैंने स्वयं पुट्टपर्थी और व्हाइट फील्ड के उनके आश्रमों में देखा है। वह स्वयं कहते थे कि इन चमत्कारों से किसी को प्रभावित नहीं होना चाहिए। यह सब छोटी बाते हैं। असली बात यह है कि जनता के हित के और दान पुण्य के आप कितने काम करते हैं। उनका जोर इन्हीं बातों पर ज्यादा रहता था। गोस्वामी तुलसीदास ने भी सारी बातें लिखने के बाद असली सार इसी बात में पाया और लिखा कि दूसरों के हित से बड़ा कोई धर्म नहीं। इसी तरह महात्मा गांधी सिर्फ भजन गाने के लिए अपनी सभा में नहीं बैठते थे, बल्कि उनके भजनों में संदेश थे। रघुपति राघव राजा राम में वह ईश्वर अल्ला तेरे नाम सबको सम्मति दे भगवान के जरिए पंथनिरपेक्षता और सामाजिक एकता का संदेश देते थे। उनका दूसरा भजन वैष्णव जन.. लोगों के दुख दर्द को अपना दुख दर्द मानकर मदद करने और दूसरे का उपकार करके कभी मन के अंदर घमंड न लाने का संदेश देता था। ऐसा नहीं है कि सत्य साई बाबा के अलावा बाकी सारे साधु-संत ठीक नहीं हैं। तमाम साधु-संत, मौलाना, पादरी बहुत अच्छा काम भी कर रहे हैं। उनकी संस्थाएं भारी संख्या में पैसा लोगों की शिक्षा और इलाज सहित तमाम दूसरी सेवाओं पर खर्च कर रही हैं, लेकिन दुर्भाग्य से सभी ऐसा नहीं कर रहे हैं। बड़ी संख्या में गलत लोग भी इनके वेश में जनता से पैसा ऐंठ रहे हैं। तमाम ऐसे लोग भोली-भाली महिलाओं को ठगते हैं। कई तांत्रिक तो ऐसे कार्य करते हैं कि उसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती है। इलाज के नाम पर महिलाओं और बच्चों को बेरहमी से पीटते हैं, भूत-प्रेत उतारने के नाम पर शारीरिक यातनाएं देते हैं। ऐसे लोगों को न धर्म या मजहब का ज्ञान होता है, न ही तंत्र विद्या का ज्ञान होता है। वे एक आडंबर बनाकर रखते हैं और उस आडंबर में लोग अंधी आस्था के कारण फंस जाते हैं। देश में पढ़े-लिखे लोगों के सामाजिक संगठनों को आगे आकर ऐसे धोखेबाज लोगों का पर्दाफाश करना चाहिए। मीडिया को भी ऐसे लोगों के खिलाफ एक मुहिम चलानी चाहिए। इस मामले में पाकिस्तान में तो बेहद गलत काम हो रहा है। वहां मजहब के नाम पर आतंकवाद के अड्डे चल रहे हैं। बहुत कम मौलाना ऐसे हैं जो सच में इस्लाम के रास्ते पर चल रहे हैं और इस्लाम का संदेश दे रहे हैं। ज्यादातर मौलाना इस्लाम के नाम पर तमाम जमात बना लेते हैं और उसमें लोगों से पैसे इकट्ठे करके हथियार और बम खरीदते हैं। हर मौलाना के साथ एके-47 लिए आतंकवादियों के गिरोह चलते हैं। नशीले पदार्थो के धंधे भी हो रहे हैं। इस्लाम और रूहानियत से इनका कोई ताल्लुक नहीं होता है, जो इनकी बात माने वह तो सच्चा मुस्लमान है और जो न माने उसे काफिर कहकर मार देते हैं। पाकिस्तान के एक मशहूर अखबार के मुताबिक इस तरह के मौलानाओं ने अब तक पिछले दस सालों में करीब छह लाख मुसलमानों को मारा है, हजारों बेगुनाह औरतों के या तो हाथ काट दिए या उनके मुंह पर तेजाब डलवाकर उन्हें बदशक्ल कर दिया। मस्जिदों के अंदर बम विस्फोट कर नमाज पढ़ रहे हजारों लोगों को मरवा दिया। सबसे दुख की बात यह है कि यह सब काम उन्होंने इस्लाम के नाम पर किया। आज पाकिस्तान में हालत यह है कि आम जनता मौलानाओं को श्रद्धा या सम्मान से नहीं देखती है। उनसे सिर्फ डरती है। भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश में तो धार्मिक लोग पीछे से राजनीति में भी जमकर दखल देते हैं। लोग उनकी बातों से गुमराह हो जाते हैं। ऐसे लोगों की सच्चाई उजागर करनी चाहिए। सत्य साई बाबा तो अपनी देह छोड़कर चले गए, लेकिन उनके संदेश और उनका दिखाया हुआ रास्ता लोगों के सामने है। उनके बारे में तमाम विवाद भी समय-समय पर आते रहे, लेकिन इनसे वह रत्ती भर भी विचलित नहीं हुए। वह अपना काम उसी तरह करते रहे और अध्यात्म के मार्ग पर चलते रहे। उनके शिष्यों की बहुत बड़ी संख्या है। मुझे उम्मीद है कि वे सब उसी तरह उनके बताए रास्ते पर चलते रहेंगे और आपस में लड़ने झगड़ने का काम नहीं करेंगे। (लेखक कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य हैं).

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