आंध्र प्रदेश के पुट्टापर्थी का नाम आज पूरे देश की जुबान पर न चढ़ा होता अगर सत्य साईं बाबा ने वहां जन्म न लिया होता। उनके देहावसान के बाद अब उनके 60 लाख से भी ज्यादा भक्तों को बाबा के एक और अवतार का इंतजार है। उन्हें उम्मीद है कि वे जल्द ही बाबा को प्रेमा साईं बाबा के नए अवतार में देखेंगे। सत्य साईं ने भविष्यवाणी की थी कि वे 96 साल तक जिंदा रहेंगे और फिर वर्ष 2023 में कर्नाटक के मंड्या जिले के गुणापर्थी गांव में प्रेमा साईं के रूप में नया अवतार लेंगे। यह साईं का अंतिम अवतार होगा। स्पष्ट है कि एक अवतार किसी भी छोटे या बड़े स्थान की किस्मत तो सुधार ही सकता है। प्रेमा साईं अवतार का जिक्र उन्होंने पहली बार वर्ष 1963 में एक प्रवचन के दौरान किया था। उन्होंने भगवान शिव के एक वादे का हवाला देते हुए कहा था कि शिव और शक्ति भारद्वाज गोत्र में तीन बार जन्म लेंगे। वर्ष 2008 में भी उन्होंने कहा था कि प्रेमा साईं के अवतरित होने से मानव मात्र में जबरदस्त एकता आएगी। प्रेमा साईं का शरीर बनने की प्रक्रिया शुरू होने की बात उन्होंने कही थी और यह भी बताया था कि प्रेमा साईं का जन्म कस्तूरी के गर्भ से होगा। यह सारी बातें शायद कुछ लोगों को अटपटी लगें और साईं भक्तों की मान्यताओं को नकारने की कवायद शुरू हो जाए लेकिन ध्यान रखना होगा कि सत्य साईं विशुद्घ सनातन धर्म के प्रचार का दावा किया करते थे। चूंकि सनातन धर्म पुनर्जन्म के सिद्घांत का दमदार प्रयोग करता है इसलिए सत्य साईं के दावों पर अति प्रतिक्रिया नहीं जताई जानी चाहिए। वैसे, साईं ने अपने जीते-जी किसी भी अति प्रतिक्रिया में खास विश्वास नहीं जताया। उनके खिलाफ कई प्रकार के आरोप लगाए गए लेकिन उन आरोपों का असर उनकी सेहत पर कभी नहीं पड़ा। कम-से-कम यह तो साफ देखा जा सकता है कि उन्होंने आज के स्वयंभू संत-महंतों की तरह अराजक व्यवहार कभी नहीं किया। अपनी मृत्यु से कुछ महीने पहले तक भी वे नियमित रूप से अध्यात्म और संस्कार प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन करते रहे। साथ ही, समाजसेवा की उनकी शानदार कोशिश के रूप में उन्होंने पुट्टापर्थी में जो अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस अस्पताल स्थापित किया था, वह भी पूरी तरह से सक्रिय रहा है। धर्मी, अधर्मी और विधर्मी में भेद किए बगैर यह अस्पताल वाकई मानवता की सेवा में लगातार काम करता रहा है। आज भारत के सिवा अन्य किसी भी देश में समूचे समाज के लिए ऐसी व्यक्तिगत पहल देखने को नहीं मिलती। अध्यात्म और समाजसेवा के माध्यम से सत्य साईं सनातन धर्म की वाकई सच्ची सेवा की है।आंध्र प्रदेश के पुट्टापर्थी का नाम आज पूरे देश की जुबान पर न चढ़ा होता अगर सत्य साईं बाबा ने वहां जन्म न लिया होता। उनके देहावसान के बाद अब उनके 60 लाख से भी ज्यादा भक्तों को बाबा के एक और अवतार का इंतजार है। उन्हें उम्मीद है कि वे जल्द ही बाबा को प्रेमा साईं बाबा के नए अवतार में देखेंगे। सत्य साईं ने भविष्यवाणी की थी कि वे 96 साल तक जिंदा रहेंगे और फिर वर्ष 2023 में कर्नाटक के मंड्या जिले के गुणापर्थी गांव में प्रेमा साईं के रूप में नया अवतार लेंगे। यह साईं का अंतिम अवतार होगा। स्पष्ट है कि एक अवतार किसी भी छोटे या बड़े स्थान की किस्मत तो सुधार ही सकता है। प्रेमा साईं अवतार का जिक्र उन्होंने पहली बार वर्ष 1963 में एक प्रवचन के दौरान किया था। उन्होंने भगवान शिव के एक वादे का हवाला देते हुए कहा था कि शिव और शक्ति भारद्वाज गोत्र में तीन बार जन्म लेंगे। वर्ष 2008 में भी उन्होंने कहा था कि प्रेमा साईं के अवतरित होने से मानव मात्र में जबरदस्त एकता आएगी। प्रेमा साईं का शरीर बनने की प्रक्रिया शुरू होने की बात उन्होंने कही थी और यह भी बताया था कि प्रेमा साईं का जन्म कस्तूरी के गर्भ से होगा। यह सारी बातें शायद कुछ लोगों को अटपटी लगें और साईं भक्तों की मान्यताओं को नकारने की कवायद शुरू हो जाए लेकिन ध्यान रखना होगा कि सत्य साईं विशुद्घ सनातन धर्म के प्रचार का दावा किया करते थे। चूंकि सनातन धर्म पुनर्जन्म के सिद्घांत का दमदार प्रयोग करता है इसलिए सत्य साईं के दावों पर अति प्रतिक्रिया नहीं जताई जानी चाहिए। वैसे, साईं ने अपने जीते-जी किसी भी अति प्रतिक्रिया में खास विश्वास नहीं जताया। उनके खिलाफ कई प्रकार के आरोप लगाए गए लेकिन उन आरोपों का असर उनकी सेहत पर कभी नहीं पड़ा। कम-से-कम यह तो साफ देखा जा सकता है कि उन्होंने आज के स्वयंभू संत-महंतों की तरह अराजक व्यवहार कभी नहीं किया। अपनी मृत्यु से कुछ महीने पहले तक भी वे नियमित रूप से अध्यात्म और संस्कार प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन करते रहे। साथ ही, समाजसेवा की उनकी शानदार कोशिश के रूप में उन्होंने पुट्टापर्थी में जो अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस अस्पताल स्थापित किया था, वह भी पूरी तरह से सक्रिय रहा है। धर्मी, अधर्मी और विधर्मी में भेद किए बगैर यह अस्पताल वाकई मानवता की सेवा में लगातार काम करता रहा है। आज भारत के सिवा अन्य किसी भी देश में समूचे समाज के लिए ऐसी व्यक्तिगत पहल देखने को नहीं मिलती। अध्यात्म और समाजसेवा के माध्यम से सत्य साईं सनातन धर्म की वाकई सच्ची सेवा की है।
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