आने वाले दिनों में धर्म का नामो-निशान मिट जाने की खबर निश्चित ही विस्मित करने वाली लग सकती है। अमेरिकन फिजिकल सोसायटी ने नौ देशों के अध्ययन पर यह निष्कर्ष निकाला है। ये देश हैं आस्ट्रेलिया, कनाडा, चेक गणराज्य, फिनलैंड, आयरलैंड, नीदरलैंड, न्यूजीलैंड और स्विट्जरलेंड। रिसर्च कॉरपोरेशन फॉर साइंस एडवांसमेंट के डॉ. रिचर्ड वीनर के मुताबिक बहुत से आधुनिक पंथनिरपेक्ष लोकतंत्रों में लोग खुद को धर्म से अलग करते जा रहे हैं। नीदरलैंड में जहां ऐसे लोगों की संख्या 40 फीसदी है तो चेक गणराज्य में 60 फीसदी लोगों ने किसी धर्म के प्रति प्रतिबद्धता नहीं दिखाई है। सवाल उठता है कि धर्म की जकड़ कम होने की इन खबरों के बीच ऐसी खबरें भी आती रहती हैं कि किस तरह आबादी का एक हिस्सा धर्मगुरुओं की शरण में है। फिर वह बौद्ध मत का प्रचार करने वाला कोई बौद्ध भिक्षु हो या हिंदू आस्था का प्रचारक कोई साधु। अमेरिका के टेक्सास प्रांत के ऑस्टिन में दो सौ एकड़ में फैले अयोध्या में जन्मे बरसाना धाम के संचालक प्रकाशानंद सरस्वती अपने भक्तों के बीच श्री स्वामीजी के नाम से जाने जाते ऐसी ही शख्सियत रहे हैं। यह अलग बात है कि इन दिनों वह फरार चल रहे हैं। दरअसल, अदालत ने 82 वर्षीय प्रकाशानंद सरस्वती पर लगे बाल यौन अत्याचार के सभी बीस आरोपों को सही पाया और सजा सुना दी। 30 वर्ष की श्यामा रोज और 27 वर्षीया वेसला टोनेसेन हेज काउंटी कोर्ट के सामने अपने आंसुओं को रोक नहीं सकीं, जब अदालत ने अपना फैसला सुनाया। गौरतलब था कि दोनों महिलाओं के परिवार आश्रम में ही रहते थे और आज भी वहीं रहते हैं। इन दो किशोरियों के साथ यौन अत्याचार का सिलसिला तब शुरू हुआ, जब वे 12 साल की थीं। प्रकाशानंद के भक्त उनके माता-पिता ने इन किशोरियों की शिकायतों पर गौर करने के बजाय उन्हें यह समझाने की कोशिश की कि एक तरह उन्हें गुरु का आशीर्वाद मिल रहा है। बहरहाल, अदालत ने सारे प्रमाणों को देखते हुए स्वामीजी के खिलाफ फैसला दिया। किशोरियों के साथ यौन अत्याचार जैसी जघन्य घटनाओं के लिए सरकारी वकील ने उन्हें हर अपराध के लिए बीस साल यानी चार सौ साल सजा सुनाने की अपील की थी। निश्चित ही अध्यात्म के नाम पर यौन अपराधों तथा अन्य किस्म के दुराचरणों में लिप्त प्रकाशानंद कोई पहले शख्स नहीं हैं। उल्टे अपने भक्तजनों को इहलोक की चिंताओं को छोड़ परलोक की चिंता करने का उपदेश देने वाले आध्यात्मिक गुरु इन दिनों ऐसे ही बेहद गैरआध्यात्मिक कारणों से सुर्खियों में रहते हैं। अभी ज्यादा दिन नहीं बीता, जब अखबार में एक अन्य स्वामी प्रेमानंद की मृत्यु का समाचार छपा था। यह जनाब 90 के दशक में तब पहली दफा सुर्खियों में आए, जब तिरूचिरापल्ली स्थित इनके आश्रम में अपनी 13 शिष्याओं के साथ यौन अत्याचार की खबर बनी और बाद में अपने एक सहयोगी की हत्या का आरोप भी इन पर लगा। इनके खिलाफ इतने पुख्ता सबूत थे कि सुप्रीमकोर्ट ने भी इन्हें दो बार उम्रकैद की सजा सुनाई थी। वैसे चाहे प्रकाशानंद या प्रेमानंद को जो गौरव हासिल नहीं हो सका, वह दक्षिण के एक सूफी संत का अपने आप को अवतार बताने वाले बेहद चर्चित अन्य बाबा को हासिल हुआ। कुछ समय पहले बीबीसी ने इन पर केंद्रित अपनी एक डाक्युमेंटरी में उन तमाम लोगों को पेश किया, जिनके साथ उन्होंने कथित तौर पर यौन अत्याचार किया था। लंदन के डेली टेलीग्राफ ने भी अपनी एक कवर स्टोरी में उनके कथित अपराधों की सूची जारी की थी, जिसके केंद्र में 20 वर्षीय अमेरिकी युवा सैम यंग की दास्तां भी शामिल थी, जो बाबा के दो भक्तों का बेटा था, जो लंबे समय से उपरोक्त बाबा के दर्शन के लिए आते थे। 16 साल की उम्र में डरा-धमकाकर उसके साथ यौन क्रीड़ाओं का जो सिलसिला बाबा ने शुरू किया, उस पर तभी परदा हट सका, जब उसने 20 साल की उम्र में अपने माता-पिता को सबकुछ बता दिया। कुछ साल पहले एक लेख रिलीजन अंडर ग्लोबलाइजेशन में पी राधाकृष्णन ने लिखा था कि एक बार जब खुद को भगवान घोषित करने वाले इस बाबा की करतूतों पर से परदा हटा, तब सैकड़ों ऐसे मामले सामने आए। फिर विदेशों में चल रहे इनके तमाम केंद्र बंद भी हो गए। अगर आप ऑस्ट्रेलिया की यात्रा पर जाएं तो वहां हवाई अड्डों पर ही इस बाल यौन अत्याचारी संत से बचने की सलाह देते पोस्टर मिल जाएंगे। अपराध और अध्यात्म का संगम सिर्फ खास धर्मो तक सीमित नहीं है। सूचना के अधिकार के तहत केरल पुलिस द्वारा पिछले दिनों जारी किए गए आंकड़े बताते हैं कि सूबे के 63 ईसाई धर्मगुरुओं के खिलाफ फिलवक्त आपराधिक मुकदमे चल रहे हैं। भारत की दंड विधान संहिता के तहत आने वाले सभी किस्म के अपराधों में पादरी लोगों की संलिप्तता पाई गई है। विगत सात साल के अपराध के आंकड़ों को देखें तो दो पादरी हत्या के आरोपी हैं, जबकि दस पादरियों पर हत्या की कोशिश का इल्जाम लगा है। एक अन्य जनाब हत्या में मदद पहुंचाने के जुर्म में सलाखों के पीछे हैं। पांच लोग बलात्कार के आरोपी हैं, जबकि कोल्लम के फादर जोसेफ अनैतिक व्यापार में अभियुक्त हैं। पांच पादरियों पर चोरी और मकानों में सेंध लगाने के इल्जाम लगे हैं। रोमन कैथोलिक चर्च के अंदर बच्चों के साथ चल रहे यौन अत्याचार की घटनाओं से पिछले कुछ सालों से लगातार परदा उठ रहा है और जिसके लिए चर्च को आधिकारिक तौर पर माफी भी मांगनी पड़ी है। वैसे चर्च के कर्ताधर्ताओं पर इस बात का भी दोषारोपण किया जा रहा है कि उन्होंने यौन अत्याचारी पादरियों के खिलाफ मिली शिकायतों के बावजूद उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की और ऐसे अपराधियों को बचाने का ही काम किया। यहां तक कि वर्तमान पोप की लंदन यात्रा को लेकर भी संशय बना हुआ था कि उन दिनों इस मामले में उनकी भूमिका भी संदेह के घेरे में थी। वैसे हिंदुस्तान के समाज सियासी हालात पर एक सरसरी निगाह डालने से भी अंदाजा लगेगा कि यहां साधुओं के प्रति प्रेम कुछ ज्यादा ही है। अगर ऐसा नहीं होता तो एक अनुमान के मुताबिक पूरे मुल्क में 80 लाख से ज्यादा ऐसे छोटे-बड़े साधु नहीं दिखाई देते। आप पाएंगे कि एक लंबा-चौड़ा दायरा है, जिसके एक छोर पर जादू-टोना, प्रेतबाधा से मुक्ति की गारंटी देने वाले या संतानप्राप्ति को सुनिश्चित करने वाले तांत्रिकों-जैसे सब-आल्टर्न साधुओं से लेकर ज्यादा से ज्यादा समय विदेशों में रहने वाले और कभी-कभार इस शहर या उस शहर धार्मिक प्रवचनों को संबोधित करने वाले बापुओं-आचार्यो का मेला लगा है। आजादी के बाद भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने उद्योगों को आधुनिक भारत का मंदिर कहा था और आज जब हम गणतंत्र की 61वीं सालगिरह मना चुके हैं, तब हम पा रहे हैं कि आध्यात्मिकता के प्रति आकर्षण गोया आज एक नए उद्योग में रूपांतरित हो गया हैं। और आध्यात्मिकता की हमारी प्यास की सबसे बड़ी कीमत बच्चे चुका रहे हैं, जो कहीं इस आश्रम में तो किसी अन्य चर्च में यौन अत्याचारों के शिकार बन रहे हैं। (लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं).
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