Wednesday, January 19, 2011

काले पत्थर से प्रसन्न देवी

उत्तर प्रदेश के देवी मंदिर में पूजा-पाठ की अनोखी परंपरा है। यहां श्रद्धालु देवी पर काले पत्थर चढ़ाकर पूजा-अर्चना कर मन्नत मांगते हैं। इटावा शहर से करीब 40 किलोमीटर दूर नगलाभीटन गांव स्थित भुजंगा देवी के मंदिर में सैकड़ों साल से यह प्रथा प्रचलित है
मंदिर के पुजारी बताते हैं कि जो श्रद्धालु सच्चे मन से भुजंगा देवी की चौखट पर शीश झुकाकर, जल के साथ काला पत्थर चढ़ाते हैं, उनकी मनोकामना जरूर पूरी होती है। वहां के निवासियों के अनुसार लगभग 200 साल से यह प्रथा कायम है। इसके पीछे कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। एक बार राजा कार्तिकेय को देवी मां ने सपना दिखाया कि नगलाभीटन के काले पहाड़ में उनकी मूर्ति मौजूद है। उसे वहां से निकलवाए और मंदिर का निर्माण कराए। साथ ही उन्होंने सपने में राजा से यह भी कहा कि जो भी भक्त पहाड़ के अंदर से निकलने वाले काले पत्थरों को उन पर अर्पित करेगा, उसकी हर मनोकामना पूरी होगी। राजा कार्तिकेय ने देवी के आदेशानुसार पहाड़ खुदवाया, तो उसमें से करीब छह फुट लंबी काले रंग की देवी की मूर्ति निकली, जिसका नामकरण भुजंगा देवी के रूप में हुआ। राजा ने वहीं देवी के भव्य मंदिर का निर्माण करवाकर सबसे पहले खुद ही काला पत्थर चढ़ाकर अपने लिए पुत्र-रत्न की कामना की। जल्द ही राजा की मनोकामना पूरी हो गई, तब से वहां श्रद्धालु काले पत्थर चढ़ाते आ रहे हैं। पुजारी बताते हैं कि पहले श्रद्धालु पहाड़ से पत्थर तोड़कर लाते थे, जिससे धीरे-धीरे उस पहाड़ का बड़ा हिस्सा टूट गया। पहाड़ समाप्त न हो इसके लिए अब श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए काले पत्थरों को मूर्ति से उतारकर मंदिर के बाहर बनवाए गए कुंड में रख दिया जाता है। जब अन्य श्रद्धालु आते हैं, तो वे कुंड से वही पत्थर लेकर मूर्ति पर अर्पित करते हैं। यह नियम तब से आज तक जारी है। वैसे तो हमेशा मंदिर में भक्तों की भीड़ लगी रहती है, लेकिन नवरात्र के दिनों में यहां हजारों की संख्या में लोग भुजंगा देवी के दर्शन करते हैं औ र मन्नत मांगते हैं। नवरात्रि के दौरान मंदिर प्रांगण के पास बहुत बड़ा मेला भी लगता है।

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