Sunday, January 9, 2011

देवमूर्ति की परिक्रमा क्यों?

धर्मशास्त्रोंं के मुताबिक प्राण प्रतिष्ठित देवमूर्ति जिस स्थान पर स्थापित होती है, उस स्थान के मध्य बिंदु से चारों ओर कुछ दूरी तक दिव्य शक्ति का आभामंडल रहता है। देवमूरत के उस आभामंडल में उसकी आभा-शक्ति के सापेक्ष परिक्रमा करने से श्रद्धालु भक्त को सहज ही आध्यात्मिक शक्ति मिल जाती है।

स्नान के बाद ही भोजन
स्ना करने से शरीर को नया रस जीवन प्राप्त होता है। इससे शरीर की त्वचा के रंध्र खुल जाते हैं और हमें एक नवीन ऊर्जा ग्रहण करने की शक्ति प्राप्त हो जाती है। स्नान का प्रभाव हमारे पाचन तंत्र पर भी पड़ता है। भोजन से पूर्व स्नान कर लेने से भोजन की तीव्र इच्छा उत्पन्न हो जाती है। इच्छित भोजन सुपाच्य हो जाता है। स्नान से पूर्व भोजन करने से भोजन में वह रुचि या आनंद नहीं रह जाता। स्नान पूर्व भोजन करने से शरीर के लिए जो उपयोगी रस बनता है, वह पूर्णतया लाभकारी नहीं होता, क्योंकि वह प्रभावहीन हो जाता है। यदि भोजन करने के बाद स्नान किया जाए तो शरीर शीतल होने से जठराग्नि भी ठंडी हो जाती है, जिससे पाचन क्रिया रुक जाती है।


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