पंडित शंभूनारायण ने बताया कि एक किंवदंती के अनुसार, हनुमान जी से शनिदेव का हमेशा बैर रहता था। एक बार हनुमान जी रामसेतु बनवा रहे थे, तब शनिदेव ने उन्हें ललकारा। उस वक्त हनुमान जी ने उनको पूंछ में लपेटकर अपना काम जारी रखा। समुद्र में कई पत्थरों से टकराते हुए शनिदेव घायल हो गए। इसके बाद उन्हें शरीर पर तेल लगाने से आराम मिला। तभी से भक्तगण हमेशा उनको तेल चढ़ाते हैं। इससे वे प्रसन्न होते हैं।
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